चिरई मन बर रखव सखोरा
चिरई मन बर रखव सखोरा
(सरसी छन्द)
गर्मी भारी बाढ़त हावय, बात रखव जी ध्यान।
भूख प्यास मा मरय कभू झन, दुनिया के वरदान।।
चिरई मन बर रखव सखोरा, तुम सबले हे आस।
पानी भरके रखव रोज जी, पियत बुझाही प्यास।।
चिरई चुरगुन के खाये बर, डालव चाउँर धान।
अपन सही सब जीव ल जानव, खुश होही भगवान।।
करे निवेदन हाथ जोड़ के, सब झन ले जगदीश।
पानी पीके चाउँर खाके, दिही सबो आशीष।।
डॉ. जगदीश "हीरा" साहू (राज्यपाल पुरस्कृत व्याख्याता)
गीतकार, संगीतकार, गायक
कड़ार (भाटापारा)
9009128538
31.05.2026
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें