माँ कर्मा चालीसा
।।अथ श्री माँ कर्मा चालीसा।। माँ कर्मा विनती सुनो, दो ऐसा वरदान। महिमा गाऊँ आपकी, सदा करहु कल्यान।। नहि जानौं कछु भक्ति मैं, करो हृदय में राज।। ज्ञान भक्ति वर दीजिये, पूर्ण होय सब काज।। भक्त शिरोमणि कर्मा माई। विपदा हरण जगत में आई।। पावन नगर धरा पर झाँसी। रामसाह जी तहँ के वासी। धर्मपरायण थे बड़ ज्ञानी। कृष्ण भक्ति मन में निज ठानी।। जो थे सफल तेल व्यापारी। भक्ति देख पूजै नर नारी।। संवत् एक हजार तिहत्तर। चैत्र कृष्ण एकादश सुंदर।। रामसाह घर बजी बधाई। सुता जन्म की खुशी मनाई।। पिता संग में मंदिर धावै। कृष्ण भक्ति में मन रम जावै।। कृष्ण भजन सबके मन मोहै। वाणी सरस सहज नित सोहै।। ब्याहे नरवर में वो जाई। गढ़ नरवर में खुशी समाई।। जबसे कर्मा नरवर आये। भक्ति प्रताप सबै जस गाये।। बैठी कर्मा ध्यान लगाये। मूरति ले पतिदेव छिपाये।। बोले कर्मा पति गति ध्याके। ठौर रखहुँ अब मूरति लाके।। महिमा जानै प्रभु गुण गावै। नर नारी महिमा बगरावै।। पाखंडी महिमा जब जाने। घात करन ईर्ष्या बस ठाने।। हाथी रोग देखि हरसाके। भरमाये भूपति कहँ जाके।। रोग दूर हो तेल नहाये। कुण्ड भरहिं सब तेली लाये।। राजाज...